मंगलवार, 15 दिसंबर 2009


मौका
(मौलिक रचना है, कोरा गपास्टक नहीं,
न ही चुराई हुयी इसलिये जो कुछ भी करना है बस कर डालो फौरन अभी, फिजाओं के बदलने का इंतजार व्यर्थ है।)

धोखा है,
हवा को आने से
किसने रोका है?

बन्द हैं दरवाजे तो क्या
रास्ते तो बन्द नहीं
बहो पवन सुत – बढो पवन पुत्र
बस यही मौका है।
धोखा है,
हवा को आने से
किसने रोका है?

घबराते सब तूफानों से
बलखाते नौजवानो से
टकराते दीवारों से
जिसने किस्मत को ठोका है।
धोखा है,
हवा को आने से
किसने रोका है?

चीर दीवार का सीना
हरियाली ने मुहँ खोला है
इस पीपल को वहाँ
भला किसने रोपा है?

धोखा है,
हवा को आने से
किसने रोका है?

विस्तार अधिक है तिमिर का
विश्वास अधिक है मगर दिये का
कालिमा के समुद्र को
जिसने पल में सोखा है।
धोखा है,
हवा को आने से
किसने रोका है?