गुरुवार, 24 सितंबर 2009

तेन त्यक्तेन भुंजीथा




ईशावास्योपनिषद का तेन त्यक्तेन भुंजीथा - माने त्याग पूर्वक भोग


इसका जिन्दा उदाहरण चित्रकूट में नाना जी हैं जिनको देख यह ज्ञान होता है कि (घनघोर) कलियुग में ऐसे लोग हैं जो अपने अलावा दूसरों के लिये भी जीतें हैं। मैं अपने को भाग्यशाली मानता हूँ कि ऐसे महान विभूति के दर्शन कर सका।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें